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चौक पर डांडा रोपने के साथ शुरू हो जाती है होली की धूम
1:54:00 am
~ अखिलेश पंडया ...
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थारी वारा मोग | Popular Posts
कृष्णावतार मावजी महाराज एक युग प्रवर्तक सिद्ध संत भी थे
भारतीय संत परम्परा में अनूठा स्थान है 18 वी सदी के संत, समाज सुधारक, दलित-उद्धारक मावजी महाराज का संत मावजी ...
हर महायात्रा के ग़म में शामिल होता है सामलिया का ये काला कुत्ता !
आप सोचते होंगे कि , मोक्ष धाम की ओर प्रस्थान करती अंतिम यात्रा में भला कुत्ते का क्या काम ? लेकिन याद कीजिए योगेश्वर श्रीकृष्ण जब महाभा...
चितरी: ग्रामीणो ने दिया शिक्षको का साथ, तो बदल गए सरकारी स्कूल के हालात !!
कहते हैं , जहाँ चाह , वहाँ राह ! एक ऐसी ही मिसाल कायम की है गलियाकोट क्षेत्र के चितरी आदर्श उच्च माध्यमिक के प्रधानाचार्य एवम पूरी टी...
सागवाड़ा विधानसभा: भाजपा में चेहरा बदलने की मांग तेज़, अनिता के सामने तनी पांच की मुट्ठी!
कभी कांग्रेस के कद्दावर नेता भीखाभाई की खानदानी सीट मानी जानेवाली सागवाड़ा विधानसभा में भाजपा के तब के उभरते नेता कनकमल कटारा ने वंशवाद के...
वागड़ का खुजराहो- गामडी देवकी शिवालय
दक्षिणी राजस्थान की वागड़ धरा सनातन काल से शिव उपासक होने के कारण शिव मंदिरो से पावन होती रही है . इसलिये पौराणिक समय से वागड़ में सैकड़ो ...
डूंगरपुर के ये 12 ज्योतिर्लिंग आपको देशभर के ज्योतिर्लिंगो से साक्षात कराते हैं
शिवरात्रि और डुंगरपुर ज़िले के शिवालयो पर राजेंद्र कुमार पंचाल का शोध परख आलेख अदभुत निर्माण के लिए प्रसिद्...
जंगल के बीच कई रहस्य समेटे देवीस्थल और तपोभूमि-पाडवा के गुफा बावसी
- राजेंद्र पंचाल , सामलिया वागड़ धरा कई सिद्ध अवधुतो , अघोरियो , साधु-संतो की तपोभूमि भी रही है. दक्षिणी राजस्थान ...
आदिवासी समाज की वागड को अनुपम देन- मांडविया हनुमान मन्दिर
मांडविया हनुमान मन्दिर, माण्डव पाल, जिला- डूंगरपुर, राजस्थान वागड़ इलाके का पूर्ण रूप से आदिवासी भाइयों द्वारा संचालित श्री हनुमानजी...
फिर ज़िंदा हुई गलालेंग की गाथा
आदिवासी अंचल की विलुप्तप्राय थाती गलालेंग और गाथा गीतों को मिला अपूर्व संबल 300 वर्ष पुराने अनछुए मौखिक साहित्य की पहली बार हुई ऑडियो...
वागड़ में केदारेश्वर का एहसास कराता ओड का जैथोलेश्वर महादेव मंदिर
जैथोलेश्वर मंदिर का प्रवेश द्वार वागड़ की प्रजा हमेशा ही शिवस्नेही रही है. इसीलिए दक्षिणी राजस्थान के इस अंचल में शायद ही कोई गांव ह...
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